2nd October International Non Violence Day 2020


2nd October International Non-Violence Day


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 ''महात्मा गांधी।''

जहां तक गांधी की प्रासंगिकता का सवाल है, तो उसके बरक्स अपनी ओर से कुछ कहने के बजाय कतिपय प्रसंगों-संदर्भों-आंकड़ों-घटनाओं-वक्तव्यों को जानना-समझना रोचक एवं सुखद रहेगा। एक बार बराक ओबामा से एक सभा में अमेरिकन छात्रों ने पूछा - ''यदि आपको अपने समकालीन या इतिहास में से किसी एक व्यक्ति के साथ डाइनिंग टेबल साझा करने का अवसर मिले, तो आप किनके साथ भोजन करना चाहेंगे?'' उन्होंने सगर्व उत्तर दिया - ''महात्मा गांधी।''

रतन टाटा से नैनो के लॉंचिंग के अवसर पर पत्रकारों ने सवाल पूछा कि ''आपके जीवन का सबसे यादगार पल कौन-सा है?'' उन्होंने उत्तर देते हुए कहा कि ''जब वे अमेरिका-प्रवास पर गए हुए थे। वहां एक नीग्रो गांधी की प्रतिमा को संकेतों से दिखाते हुए अपने छोटे बच्चे से कह रहा था कि बेटा, ये महात्मा गांधी हैं, ये हमारे लिए सम्मान एवं न्याय की लड़ाई लड़ने वाले महान नेता मार्टिन लूथर किंग के गुरु हैं, इन्हें प्रणाम करो।'' रतन टाटा ने कहा कि यही उनकी जिंदगी का सबसे यादगार और गौरवपूर्ण क्षण था।

 

प्रसिद्ध उद्यमी नारायण मूर्त्ति से जब पूछा गया कि उन्हें इंफोसिस जैसी कंपनी की स्थापना की प्रेरणा किससे मिली तो उन्होंने तपाक से उत्तर दिया - 'गांधी से।' वर्गीज कूरियन गुजरात के आनन्द में अमूल जैसे सहकारी आंदोलनों के प्रयोग की चर्चा करते हुए गांधी को अपनी प्रेरणा बता रहे थे। राजकुमार हिरानी अपनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म ''लगे रहो मुन्ना भाई'' की सफलता का सारा श्रेय गांधी जैसे मजबूत 'कंटेंट' को देते हैं।

''पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री''

भारत के तीसरे और स्थायी तौर पर दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश के बेहद निम्नवर्गीय परिवार में हुआ था. इनका वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था. शास्त्री जी के पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव एक गरीब शिक्षक थे जो बाद में भारत सरकार के राजस्व विभाग के क्लर्क के पद पर आसीन हुए. लाल बहादुर की शिक्षा हरीशचंद्र उच्च विद्यालय और काशी पीठ में ही हुई और यहीं स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि से सम्मानित किया गया. तत्पश्चात वह भारत सेवक संघ से जुड़ गए. यहीं से उनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत हुई. इनकी प्रतिभा और निष्ठा को देखते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के पश्चात कॉग्रेस पार्टी ने लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री पद का उत्तरदायित्व सौंप दिया.

सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट योगदान और देशभक्ति के लिए उन्हें वर्ष 1966 में भारत रत्न के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.





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